सुनहरा मौका अब 12वीं के बाद भी बन सकेंगे शिक्षक. ऐसे मिलेगा मौका. जल्दी करें आगे पढ़ें।।

अगर आप भी कक्षा 12 पास हैं तो आपके पास है सुनहरा मौका आप भी शिक्षक बन सकते है राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने नए इंटिग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) की मान्यता के लिए उत्तराखंड के दरवाजे खोल दिए हैं। हालांकि बीएड की मान्यता के दरवाजे अभी बंद हैं।
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एनसीटीई ने इस साल से चार वर्षीय इंटिग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों में 12वीं के बाद सीधे दाखिला मिलेगा। कोर्स करने के बाद जो डिग्री मिलेगी, वह बीएड के बराबर मानी जाएगी। इस कोर्स को सरकारी विश्वविद्यालय व कॉलेज के साथ ही निजी विवि और कॉलेज भी ......
2015 से बीएड की नई मान्यता पर रोक,,,,,,,
उत्तराखंड में वर्ष 2015 से बीएड की नई मान्यता पर रोक लगी हुई है। इस वजह से चार साल से यहां कोई भी नया बीएड कॉलेज नहीं खुला, लेकिन जो कॉलेज पहले से चल रहे हैं, वे इस नए कोर्स को चला सकेंगे।
इस कोर्स की मान्यता के लिए कॉलेजों को तीन जून से 31 जुलाई तक आवेदन करना होगा। यह मान्यता सत्र 2020-21 के लिए होगी। कोर्स अगले वर्ष से ही शुरू किया जाएगा। यह दो कोर्स होंगे। पहला कोर्स प्री प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक पढ़ाने के लिए होगा।
इन राज्यों में चलेगा आईटीईपी
दूसरा कोर्स अपर प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर तक के शिक्षण के लिए होगा। एनसीटीई के सदस्य सचिव संजय अवस्थी की ओर से सभी संबंधित राज्यों को मान्यता की प्रक्रिया अमल में लाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
किन राज्यों में चलेगा चार वर्षीय आईटीईपी
आईटीईपी (प्री प्राइमरी से प्राइमरी लेवल) : हरियाणा, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, बिहार, दिल्ली, राजस्थान।
आईटीईपी (अपर प्राइमरी से सेकेंडरी लेवल) : उत्तराखंड, तेलंगाना, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, कर्नाटक, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और राजस्थान
आईटीईपी (प्री प्राइमरी से प्राइमरी लेवल) : हरियाणा, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, बिहार, दिल्ली, राजस्थान।
आईटीईपी (अपर प्राइमरी से सेकेंडरी लेवल) : उत्तराखंड, तेलंगाना, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, कर्नाटक, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और राजस्थान
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हर्ष का विषय
बीएड पर वर्ष 2015 से रोक लगी है। डीएलएड केवल सरकारी संस्थानों में ही संचालित हुआ है। अब चार वर्षीय आईटीईपी के लिए उत्तराखंड को भी मान्यता मिलेगी जो कि हर्ष का विषय है। हम एनसीटीई के इस कदम का स्वागत करते हैं।
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20 साल बाद भी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली
20 साल बाद भी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म है 'सूर्यवंशम', बन गया एक रिकॉर्ड ह
ऐसा कम ही होता है कि कोई फिल्म सिनेमाघरों में जब रिलीज हो तो दर्शकों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया हो लेकिन टीवी पर आते ही हिट हो गया। इन्हीं में से एक फिल्म है सूर्यवंशम। अमिताभ बच्चन और सौंदर्या की मुख्य भूमिका से सजी फिल्म सूर्यवंशम 21 मई 1999 को जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो यह बिल्कुल भी पसंद नहीं की गई थी। इसके बावजूद सूर्यवंशम टीवी पर सबसे ज्यादा दिखाई जाने वाली फिल्म है
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पूरी कहानी यहां पढ़ें
कहानी बहुत पुराने समय के भरतपुर गाँव की है। ठाकुर भानुप्रताप सिंह (अमिताभ बच्चन) उस गाँव का सरपंच होता है। उसके तीन बच्चे होते हैं। गाँव के सभी लोग उसकी इज्जत करते हैं। गौरी (रचना बेनर्जी) के माता-पिता के मौत के बाद वो उसे अपने ही घर में ले आते हैं और उसकी शिक्षा और अन्य जरूरतें पूरी करते हैं।
ठाकुर भानुप्रताप का सबसे छोटा बेटा, हीरा (अमिताभ बच्चन, दोहरी भूमिका) अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर सारा दिन बस उस लड़की, गौरी के आगे पीछे घूमता रहता है। पढ़ाई में उसे अंक के नाम पर बस शून्य ही मिलता है, पर वो इतना गंवार होता है कि उसे सौ में कितने शून्य होते हैं, उतना भी पता नहीं होता है और वो कभी चार तो कभी पाँच शून्य लगाकर अपने माता-पिता को धोका देने की कोशिश करते रहता है, पर हमेशा पकड़ा जाता है।
एक दिन जब गौरी की शिक्षिका उसे उसकी गलती की सजा देते रहती है, तब हीरा बीच में आते हुए शिक्षिका के साथ ही मारपीट शुरू कर देता है। जब ठाकुर भानुप्रताप को अपने बेटे की घटिया हरकतों के बारे में पता चलता है तो वो उसे अपना बेटा मानने से भी इंकार कर देते हैं और गौरी के अच्छे भविष्य के लिए उसे शहर में पढ़ने भेज देते हैं। गौरी के जाने के बाद हीरा कभी विद्यालय में कदम तक नहीं रखता है और गंवार का गंवार ही रह जाता है।
- बड़े होने के बाद
गौरी अपनी पढ़ाई पूरी कर वापस आ जाती है। एक दिन जब गौरी अपना इलाज अस्पताल में कराने जाती है, तब उसके साथ हीरा भी जाता है। अस्पताल में डॉक्टर उसे इंजेक्शन लगाता है, और उससे गौरी को कुछ खास दर्द नहीं होता, लेकिन हीरा उस डॉक्टर के ऊपर गुस्सा हो जाता है और उसके साथ मारपीट करने लगता है और उसके इंजेक्शन को उसी को लगा देता है। जब ये बात हीरा के पिता को पता चलती है तो वो बहुत गुस्सा होते हैं, तब उनकी पत्नी कहती है कि हीरा शादी के बाद सुधर जाएगा। इसी के साथ वो ये भी कहती है कि गौरी को हीरा बहुत पसंद करता है।
ठाकुर भानुप्रताप उन दोनों से बिना पूछे ही उन दोनों की शादी तय कर देता है। जब ये बात गौरी को पता चलती है तो वो ठाकुर भानुप्रताप के द्वारा किए अहसान के कारण उन्हें कुछ बोल नहीं पाती, पर उस घटिया और गंवार लड़के से शादी करने से अच्छा मरना पसंद करती है और नदी में डूब कर ख़ुदकुशी करने की कोशिश करती है। हीरा उसे देख कर बचा लेता है, और तब गौरी उसे सारी बात बताती है। जिसके बाद हीरा शादी से इंकार कर देता है। भानुप्रताप इसके बाद उसकी शादी एक अच्छे और पढ़े-लिखे लड़के से करा देता है।
एक दिन राधा (सौन्दर्या) और उसके साथ मेजर रंजीत सिंह (कादर खान) उसके गाँव आते हैं। राधा के भाई की शादी हीरा की बहन से तय हो चुकी होती है। वे दोनों हीरा और धर्मेन्द्र (अनुपम खेर) को देख कर घर के नौकर समझते हैं। जब राधा का पिता (शिवाजी साटम) आता है, तो वो हीरा के ठाकुर भानुप्रताप के चेहरे से मिलता चेहरा होने के कारण ये बात उससे पूछता है, तब उन्हें पता चलता है कि वो ठाकुर भानुप्रताप का बेटा है। राधा को ये जान कर हैरानी होती है कि इतने अमीर पिता का बेटा इस तरह नौकर बना क्यों काम कर रहा है। जब वो ये बात जानने के लिए उसके दोस्त धर्मेन्द्र से बात करती है तो धर्मेन्द्र उसे कहानी इस तरह सुनाता है कि जैसे हीरा कोई महान त्यागी किस्म का इंसान है। उसके त्याग से भरे किस्से सुन कर राधा को उससे प्यार हो जाता है।
देशराज ठाकुर अपने बेटे का रिश्ता राधा के लिए लाता है और उसकी माँ तुरंत इस रिश्ते के लिए मान जाती है और उसकी शादी तय हो जाती है। राधा अपने घर वालों को बताती है कि वो हीरा से प्यार करती है, पर उससे कुछ नहीं बदलता, बल्कि उसकी माँ जा कर ठाकुर भानुप्रताप से इस बारे में शिकायत करती है। ठाकुर भानुप्रताप अब हीरा से कहता है कि वो अपने पिता या राधा में से किसी एक को चुन ले। अगर वो अपने पिता को चुनता है तो वो उसे अपना बेटा मान लेगा।
राधा के शादी के दिन वो उसे वहाँ से भगा कर ले जाता है और मंदिर में शादी कर लेता है। जब वो दोनों शादी कर के घर आते हैं तो भानुप्रताप उन दोनों के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाता है और घर से बाहर कर देता है। बेघर हुए राधा और हीरा को धर्मेन्द्र अपने घर में रहने देता है। घर चलाने के लिए हीरा मजदूरी करने लगता है। जब ये बात राधा को पता चलती है तो वो उसे कोई और ढंग के काम करने को बोलती है। मेजर रंजीत उसे लोन लेकर बस चलाने बोलता है। हीरा अब बस ड्राइवर बन जाता है। एक दिन जब राधा की मुलाक़ात गौरी से होती है तो गौरी उसे ताने मारते है और ताना मारते हुए हीरा उसे सुन लेता है। वो राधा को अपनी पढ़ाई पूरी करने को कहता है।
- कुछ सालों के बाद
अब राधा अपनी पढ़ाई पूरी कर कलेक्टर बन जाती है और हीरा कई बसों का मालिक बन चुका है। उनका एक बेटा भी है। एक दिन उनका बेटे की मुलाक़ात ठाकुर भानुप्रताप से होती है। वो गलती से स्याही उस बच्चे के शर्ट में गिरा देता है, पर वो बच्चा उसके ऊपर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करता, ये देख कर वो बोलता है कि इसके कितने अच्छे संस्कार है। तभी उसका नौकर बोलता है कि ये आपका ही पोता है, तो संस्कार तो अच्छे होंगे ही।
इसके बाद से ठाकुर भानुप्रताप उस बच्चे से मिलने लगता है। वे दोनों काफी अच्छे दोस्त बन जाते हैं। हीरा और राधा को अपने बच्चे से पता चलता है कि वो हीरा की तरह दिखने वाले किसी व्यक्ति का दोस्त बन चुका है। वे दोनों समझ जाते हैं कि वो और कोई नहीं, बल्कि ठाकुर भानुप्रताप है। हीरा अपने पिता के लिए अपने बेटे के हाथ से खीर भेजता है। वहीं मीरा की माँ को भी पता चल जाता है कि ठाकुर भानुप्रताप अपने पोते से छुप छुप कर मिलते हैं। घर में आने के बाद जब ठाकुर भानुप्रताप को पता चलता है कि उसकी पत्नी को भी ये सब पता है तो अंत में वो हीरा को माफ कर अपने बेटे के रूप में स्वीकार करने को तैयार हो जाता है। वो उसे फोन करता है, पर बोलने से पहले ही उसके मुंह से खून निकलता है। उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है।
अस्पताल के सामने भीड़ लग जाता है। केवड़ा ठाकुर आ कर कहता है कि हीरा अपने घर से निकाल दिये जाने का बदला लेने के लिए अपने पिता को खीर में जहर देकर मारने की कोशिश किया था। जब केवड़ा ठाकुर और उसके आदमी मिल कर हीरा को मारते रहते हैं, तभी ठाकुर भानुप्रताप वहाँ आ जाता है। वो बताता है कि जब वो खीर लेकर घर जा रहा था, तो बीच में गाड़ी रुकी हुई थी, तब वो वापस गाड़ी में गया तो उसे केवड़ा ठाकुर से आने वाली खुशबू वहाँ आई थी, लेकिन वो उसे अनदेखा कर चले गया था। हीरा और उसके पिता अब केवड़ा ठाकुर को मारने लगते हैं। अंत में केवड़ा ठाकुर मान लेता है कि उसी ने जहर मिलाया था और उससे माफी मांगता है।
फिल्म के अंत में दिखाया जाता है कि हीरा का बेटा "कोरे कोरे सपने मेरे" गाना गाते रहता है, और तभी ठाकुर भानुप्रताप आ जाता है, और आगे का गाना पूरा करता है। "वादा है वादा, चाहेंगे तुमको, जीवन से ज्यादा" गाने के साथ कहानी खत्म होती है।

सा नहीं है कि सूर्यवंशम यूं ही टीवी पर बार-बार दिखाई जाती है बल्कि 20 साल बाद भी ये टीवी पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में से एक है। फिल्म के 20 साल पूरे होने पर अमिताभ के एक फैन ने ट्वीट किया, जिसमें टीवी प्रोग्राम की टीआरपी दिखाने वाली लिस्ट शेयर की गई है। '2018 में फिल्म गोलमाल अगेन के बाद सूर्यवंशम को सबसे ज्यादा लोगों ने देखा। यही नहीं साल 2018 के 35वें हफ्ते में सूर्यवंशम पहले नंबर पर रहा।' यही नहीं इस फिल्म को अभी भी खूब पसंद किया जाता है।

सूर्यवंशम के टीवी पर खूब दिखाए जाने का मजाक अक्सर बनता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है। दरअसल, सेटमैक्स चैनल ने सूर्यवंशम की रिलीज के वक्त इसके प्रसारण के राइट्स 100 साल के लिए खरीद लिए थे। यही कारण है कि अमिताभ बच्चन और सौंदर्या की ये फिल्म आपको बार-बार टीवी पर दिखाई देती है।

इस फिल्म से एक्ट्रेस सौंदर्या ने बॉलीवुड डेब्यू किया था। उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन यानी हीरा ठाकुर की पत्नी का रोल निभाया था। सौंदर्या का निधन महज 31 साल की उम्र हो गया। सौंदर्या भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार करने करीमनगर जा रही थीं, तभी बेंगलुरू के जक्कुर एयरफील्ड से उड़ान भरकर जब हेलीकॉप्टर 100 फीट तक पहुंचा तभी क्रैश हो गया। हादसे में सौंदर्या, उनके भाई और दो अन्य की मौत हो गई थी। हादसे के वक्त सौंदर्या सात महीने की प्रेग्नेंट थीं।

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